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Glimpses into the lives of different families

I love working with the girls who come to the Tech Center. Together we play, learn, work, and talk about what we love, our likes and dislikes. They come to FAT to learn computer skills, but as time goes by, they realize that they start understanding themselves better. They want to know who they are, and what they can do with their lives.

We have to establish a relationship based on trust, not just with the girls, but also with their family and members of their community. It takes the girls several months to understand what they want to do with their lives, and how they perceive themselves. Initially they say it’s enough just to be able to study because their families won’t let them complete their education. They have big dreams, but are content with the chance to study even a little. They don’t know how to get out of this situation as there is no one to guide them.

The girls start trusting us so much that they are able to confide in us about all their troubles. There is a lot we find out by just talking to them, and sometimes we feel helpless. They ask themselves questions that they think they have no answers to, but they do have the answers, all they lack is guidance and direction. After we find out so much about their lives, it is important we meet their families as they are the most important in their lives.

The girls are happy that we meet their parents, and help they convey their messages to their families. I meet both, the father and the mother, but I’ve noticed the mother knows more about the girl. The father’s know where their daughters are going, but not much beyond that. I enjoy meeting their parents. Some mothers tell us how difficult it becomes when their children don’t listen to them. They complain that there are elders in the house, but the girls don’t dress appropriately, that they talk back if we scold them. I listen to their mothers, but tell them that they should also listen to their children, and not pay attention to what others say. They say they understand their children, but society doesn’t. So they have to scold the girls. We invited the parents to FAT, but they say they are very busy with housework, and they hardly have time to do anything anymore.

One girl’s siblings are very unappreciative. The younger sisters make fun of her, while the brothers say she is not capable of doing anything and should be sent to the village. I asked her mother why they say this. She said it’s because the girl doesn’t listen to anyone, not even her elder brother, and if this continues they won’t allow her to go anywhere. She is beaten by her father and brother, and I am unable to stop them. Why can’t she behave herself? I told her that the girl thinks her family doesn’t understand her, and that maybe she’s unable to express herself in a better way. It is very important that the girls find a proper way to convey their message.

Another mother wants her daughter to get married as soon as she finishes school, and says she can do what she likes till then. After marriage she is not their problem, and the in-laws will deal with her. I asked her why would the girl stop being your concern after her wedding, to which she replied that girls are “other’s property” and belong to their in-laws. We have no say in their lives after marriage.

There are some girls who don’t talk much, some who talk a lot, while others have to leave their education because of the situation at home. I have found out many things about the girls, and together we try and find solutions to all their problems so they can grow and do well in life.

 


अलग अलग परिवारों की ज़िंदगी की झलक

 

टेक सेंटर में जितनी भी लड़कियां आती है उनके साथ काम करने मे, उनसे बात करना, एक-दूसरे के साथ मस्ती करना, अपनी और उनकी सुख-दुख मे शामिल होना बहुत अच्छा लगता है चाहे हो किसी भी तरह की परिस्थिति क्यों ना हो | फैट में हर लड़की यही सोच कर आती है कि कम्प्युटर कोर्स करेंगे और बहुत सारी जानकारियाँ प्राप्त करेंगे मगर जैसे-जैसे समय बीतने लगता है तो वह महसूस करने लगती है कि मैं फैट मे अपने आपको जानने के लिए आए है कि मैं कौन और मैं क्या कर सकती है अपनी ज़िंदगी में |

लड़कियों के साथ भरोसे वाला रिशता बनाने के लिए इन एक साल मे उनके साथ तो काम करते ही है मगर उनके माता- पिता और बस्तियों के लोगो के साथ भी रिश्ता बनाते है | लड़कियों को समझने मे चार-पाँच महीने मे तो लग ही जाते है कि वह अपनी जिंदगी मे क्या करना चाहती है और अपने आपको कहाँ देखती है, शुरू-शुरू मे कुछ लड़कियाँ कहती है कि दीदी कुछ पढ़ना ही आ जाए वही बहुत है हमारे लिए क्योकि परिवार वाले जितना हम चाहते है उतना तो कभी करने नही देंगे मगर जितना मिल रहा है उतने मे भी खुश है और वही कुछ लड़कियों के सपने हजारो है कि कुछ बनना है लेकिन रुकावटे बहुत है और हमे नही पता कि इस रुकावटों को कैसे दूर करे क्योकि कोई बताता ही नही है |

लड़कियाँ का भरोसा इतना अच्छा हो जाता है कि वह खुद आकर अपनी सारी परेशानियाँ बताती है वरना हम उनके पास जाते है | हम बातचीत से बहुत कुछ जान तो लेते है मगर कही ना कही कमी तब भी महसूस होती है कि लड़कियाँ थोड़ा सा ही पढे, सपनों मे पंख ना लगाए क्यो बोलती है | वह अपने आप से ही सवाल करती है और वह सोचती है कि उनके पास कोई जवाब नही होता है, उनके पास जवाब होता लेकिन उनको बस एक दिशा की जरूरत होती है | जब उनकी जिंदगी के बारे इतना कुछ पता चल ही जाता है तो परिवार वालो से मिल भी उतना ही जरूरी होता है , क्योकि परिवार वाले सबसे बड़ा हिस्सा होते है |

मैं जब लड़कियों के माता-पिता से मिलने वाली थी तो लड़कियाँ बहुत खुश थी क्योकि लड़कियाँ भी चाहती है कि हम उनके परिवार वालो से मिले उनको समझाए कि उनके परिवार वाले उनकी सुने, मैं सभी लड़कियों के एक या दो के पापा से मिली और माताओं से, वैसे भी लड़कियाँ के बारे मे माताएँ ज्यादा अच्छे जानती है पापा ज्यादा अपनी भूमिका नही निभाते, सभी के पापा इतना तो जानते ही है कि उनकी बेटी कहाँ जाती है मगर ज्यादा कुछ नही पुछते है जो भी पुछना होता है तो वह उनकी मम्मी से पुछते है, जब मैं आंटियों से मिल रही थी तो उनसे बात करके बहुत ही मजा आया | सभी की माताओं ने कुछ ना कुछ बाते बताई कि आज-कल की लड़कियाँ किसी की बात नही सुनती है अपनी चलाती है, घर पर बड़े बुजुर्ग होते है और यह लड़की कपड़े सही से नही पहनती है | इस लड़की मे शर्म नही है, हम सभी बोल बोल के थक गए जब बोलते है तो वह उल्टा जवाब देती है और साथ ही साथ घर का भी काम नही करती है हमारे बड़े बुजुर्ग कहते रहते है कि इस लड़की को जरा भी शर्म नही है ना बोले की तमीज है और ना ही कपड़े पहनने की | मैं उस वक्त उनकी बाते सुनी और मैं अपनी समझकर बस यही कहा कि आप अपनी बेटी को समझे लोग तो कुछ भी बोलते रहते है | उनकी मम्मी ने कहा कि हम तो समझ ही जाते है मगर यहाँ के आस-पड़ोस के लोग नही समझते है इस लिए मुझे अपनी ही बेटी को बोलना पड़ता है | जब मैंने कहा की आंटी आप फैट आई हो तो आंटी ने कहा कि घर के कामो मे हमेशा लगी रहती है तो समय ही नही मिलता है कही भी आने जाने का, अपनी जिंदगी तो बस घर के कामो मे ही रह गई है |

उसी तरफ दो छोटी बहने जो अपनी बड़ी बहन का मजाक उड़ाती है और उसका भाई कहता रहता है कि वह कुछ नही कर सकती है पढ़ लिख नही पाएँगी उसको गाँव भेजा दो, मैं आंटी से पूछा ऐसा क्यो बोलते है? क्योकि वह किसी कि भी बात नही मानती है, लड़की अपने बड़े भाई की इज्जत करे वो पूरे घर को चलाता है और वही उसकी बात सुनती नही अगर ऐसे करेगी तो हम इसे कही नही जाने नही देंगे | इसी वजह से मेरी बेटी अपने भाई और पापा से मार खाती है और मैं रोक नही सकती क्योकि यही ऐसी गलती क्यो करती है प्यार से रहे तो सब अच्छा होगा | यही सब उसकी मम्मी मुझे पता रही थी लड़कियाँ को लगता है कि उनके परिवार वाले उसको समझते नही है और उसकी बात को नही सुनते है | मगर वह अपनी बात सही से नही रख पाती है और कही पर भी और किसी के सामने कुछ भी बोल देती है | उनको इतना समझने की जरूरत होती है कि परिवार वालो के सामने अपनी बात कैसे रखनी चाहिए |

एक लड़की की मम्मी बोल रही थी कि इसकी पढ़ाई हो जाएंगी तो इसके बाद तो इसकी शादी ही करनी है मगर अभी तो समय है जो करना है वह करे | जितना पढ़ना है पढ़ ले फिर शादी हो जाएँगी तो इसके ससुराल वाले जाने के बारे मे हम से कोई लेना देना नही होगा | मैंने पूछा क्यो नही लेना-देना होगा? लड़की तो पराया धन होती है कभी न कभी उनको जाना ही होता है फिर सारे फैसले उसका दूसरा परिवार लेता है हम नही |

कुछ लड़कियाँ है जो अपने घर ज्यादा नही बोलती है चुप रहती है और कुछ है कि घर की परिस्थिति अपनी पढ़ाई छोडनी पड़ती है इसी तरह मुझे बहुत कुछ पता चला और इन सब को सोचते हुए हम सब मिलकर हल खोजते है ताकि लड़कियों को अपनी जिंदगी मे कैसे आगे बढ़े उसका रस्ता निकलती है |

- Rekha is currently a Program Trainee in the Young Women's Leadership Program at FAT.