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Preeti's story as told by Nisha

My name is Nisha and I work at Feminist Approach to Technology (FAT). FAT works with young women and girls in the field of technology and helps them to get a better understanding on various social issues. I have been associated with FAT’s Young Women Leadership Program as an intern for last one month now.  Earlier I used to study here and now I am associated as a facilitator with them. In this program, girls are taught computers. They are encouraged to understand their issues and find solutions to these issues on their own.
 
I got to learn a lot of things in the last one month. During one of my classes, I came across Preeti (name changed for confidentiality), one of my neighbours.  Looking at Preeti, I felt that she was very eager to learn computers; however, she was not able to negotiate at her home. After collecting some courage, she joined FAT. Initially, when Preeti started coming to FAT, she used to sit silently in the class, all by herself, not talking to anyone. Gradually, she started to talk to her fellow girls; her understanding on social issues also grew stronger and she gained confidence. She started liking coming to FAT and also started to talk openly. 
 
As soon as she started learning computer, she got more eager to explore further. Seeing her interest in computer, Preeti’s father got a computer system for her at home. Whatever she would learn here, she would go back and keep thinking about it. She would try to learn more and more about computers and would always keep practising at home. She would even make charts of topics to remember and stick them around on the walls of her house. One day, Preeti’s mother said ,”You don’t help me with household chores at all and you spend your entire day on computer. Have you even learnt something”? Hearing this,Preeti left everything right away; sat in front of the system and created something to show to her mother. Her mother got impressed. She was really happy to see the change in Preeti ,as earlier she was not even able to speak in front of anyone and today she was putting across her thoughts so clearly. Preeti wants to do a lot of things and she continues to negotiate for herself to proceed further in the areas of her interest. This seems to be a positive step towards Preeti’s future.
 
मेरा नाम निशा है  और मैं फैट मे काम करती हूँ । फेमिनिस्ट अप्प्रोच टू टेक्नोलॉजी (FAT), युवा महिला और लड़कियों के साथ टेक्नालजी के क्षेत्र मे काम करती है और सामाजिक मुद्दो पर समझ बनाती है । मुझे इस संस्था में यंग वुमेन लीडरशिप प्रोग्राम में इंटर्न के तौर पे काम करते हुए एक महीना हुआ है। पहले में यहाँ सीखती थी और आज में यहाँ सीखती हु। इस प्रोग्राम में कंप्यूटर क्लासेस होती है। यहाँ लड़कियों को टेक्नोलॉजी की सहायता से अपने मुद्दो को सम्झना और उनका  समाधान खुद से निकालना सिखाया जाता है। 
 
इस एक महीने के दौरान मुझे अपनी क्लास मे बहुत सी चीजे सीखने को मिली।  मैंने एक लड़की को देखा, जो मेरे घर से कुछ ही दुरी पर रहती है, उसका नाम प्रीति (गुप्तता रखने के लिए नाम बदला गया है। उसे देखकर मुझे लगता की उसमे कंप्यूटर सिखने का बहुत उत्साह था, लेकिन कहीं न कहीं वो अपने घर में negotiation नहीं कर पा रही थी।  लेकिन कुछ दिनों बाद  वो थोड़ा सा हिम्मत जुटा कर फैट में आई। जब वह फैट आई तो बहुत चुप सी रहती थी, न ही किसी से बात करना और ना ही अपनी बाते शेयर करती । जैसे –जैसे प्रीति  फैट मे अपना  समय व्यतीत करने लगी, सामाजिक मुद्दो पर भी उसकी समझ साथ –साथ बढ़ने लगी । उसे फैट मे आना अच्छा लगने लगा और वह लड़कियों से भी खुलकर बात करने लगी । 
 
प्रीति  कंप्यूटर सिखने लगी और धीरे धीरे जब उसका इंटरेस्ट बढ़ने लगा तो दो तीन महीने बाद उसके घर वाले कंप्यूटर लेकर आये, प्रीति जब भी फैट आकर कंप्यूटर में कुछ नया सीखती तो वह घर जाकर भी फैट मे पढ़ाई गई चीजों के बारे मे विचार करती और चीजों के बारे मे ज्यादा से ज्यादा जानने की कोशिश करती। उस चीज को वह घर के कंप्यूटर में प्रैक्टिस करती और कुछ चीजो को याद करने के लिए अपने घर में चार्ट पेपर लगाती, ताकि उसे वह चीजें याद रहे।  एक दिन प्रीति  की मम्मी  ने प्रीति  को कहा, "सारे दिन कंप्यूटर में लगी रहती है घर का कुछ काम नहीं करती, तुझे कुछ आता भी है कंप्यूटर में? तो प्रीति सारा काम छोड़कर कंप्यूटर के सामने बैठ गई और जल्दी से कंप्यूटर पर काम करके और कुछ बनाकर अपनी मम्मी को दिखा दिया। प्रीति  की मम्मी  देखती रह गई और खुश भी हुई कि एक लड़की जो कभी बोलती नहीं थी अपनी बात किसी के सामने नहीं रख पाती थी आज वो सबके सामने अपनी बात रख पा रही है और बोल पा रही है।  प्रीति  के पास सोचने के लिए बहुत कुछ है और वो सोचती भी है, पर उसे पूरा कैसे करें उसके लिए प्रीति  काफी कोशिश कर रही है। वह अपने घर मे negotiation कर रही है अपनी जिंदगी मे आगे बढ्ने के लिए । यह प्रीति के भविष्य के लिए एक बहुत सकारातमक है ।
- Nisha, Intern, YWLP